रजिस्ट्री कार्यालय में आउटसोर्सिंग के माध्यम से कार्यरत कंप्यूटर ऑपरेटरों की कार्यशैली को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। नागरिकों का आरोप है कि दस्तावेजों की जांच, त्रुटि सुधार और अन्य तकनीकी प्रक्रियाओं के नाम पर उन्हें अनावश्यक रूप से कार्यालय के चक्कर लगवाए जाते हैं। कई लोगों ने यह भी आरोप लगाया है कि समय पर काम कराने के लिए अप्रत्यक्ष रूप से अतिरिक्त राशि की मांग की जाती है।
जानकारी के अनुसार आईटी सॉल्यूशन कंपनी के माध्यम से नियुक्त कई ऑपरेटर पिछले एक दशक से अधिक समय से इसी कार्यालय में पदस्थ हैं। हाल ही में नई एजेंसी टॉप ग्रेड मैनेजमेंट को जिम्मेदारी सौंपी गई, लेकिन पुराने कर्मचारियों को यथावत बनाए रखा गया। इससे व्यवस्था में अपेक्षित बदलाव नहीं दिख रहा है।
सरकारी काम निजी कर्मचारियों के भरोसे
रजिस्ट्री विभाग में कंप्यूटर ऑपरेटरों की नियुक्ति सीधे विभाग द्वारा नहीं की जाती, बल्कि निजी एजेंसियों के माध्यम से की जाती है। ऐसे में शासकीय कार्यों में निजी कर्मचारियों की महत्वपूर्ण भूमिका को लेकर जवाबदेही, निगरानी और पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि संवेदनशील अभिलेखों और राजस्व संबंधी कार्यों में विभागीय नियंत्रण मजबूत होना चाहिए।
गोपनीयता पर भी उठे सवाल
सूत्रों के अनुसार वर्षों से एक ही स्थान पर कार्यरत कुछ ऑपरेटरों पर शासकीय दस्तावेजों की गोपनीयता भंग करने के आरोप भी लगाए जा रहे हैं। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि संवेदनशील दस्तावेजों की जानकारी बाहरी लोगों तक पहुंचने की आशंका बनी रहती है। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन मामले ने विभागीय निगरानी व्यवस्था पर सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं।
शिकायतों की होगी जांच
जिला पंजीयक राजीव स्वर्णकार ने कहा कि इस प्रकार की शिकायतें फिलहाल उनके संज्ञान में नहीं आई हैं। फिर भी मामले की जांच कराई जाएगी और यदि कोई अनियमितता पाई जाती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

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