कार्यक्रम में ओम बिरला, केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू तथा सांसद बृजमोहन अग्रवाल भी मौजूद रहे। राज्यपाल के सचिव डॉ. सी.आर. प्रसन्ना सहित लोकभवन के अधिकारियों और कर्मचारियों ने भी पुष्प अर्पित कर वीरांगना के शौर्य, साहस और बलिदान को स्मरण किया।
राज्यपाल ने कहा कि रानी लक्ष्मीबाई का जीवन देशभक्ति, त्याग और अदम्य साहस का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि उनकी प्रेरणादायी गाथा आज भी युवाओं और महिलाओं को राष्ट्रसेवा तथा आत्मसम्मान के लिए संघर्ष करने की प्रेरणा देती है।
गौरतलब है कि 18 जून 1858 को ग्वालियर के समीप अंग्रेजी सेना से युद्ध करते हुए रानी लक्ष्मीबाई ने मातृभूमि की रक्षा के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया था। उनका प्रसिद्ध उद्घोष “मैं अपनी झांसी नहीं दूंगी” भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की अमर विरासत बन चुका है।

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