TMC में महाबगावत! 19 सांसदों के दावे से ममता की बढ़ी मुश्किलें, सोमवार को होगा शक्ति प्रदर्शन

पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) में पिछले कुछ दिनों से जारी राजनीतिक घमासान अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचता दिखाई दे रहा है। पार्टी के भीतर उठे बगावत के सुर अब खुलकर सामने आने लगे हैं और माना जा रहा है कि सोमवार को इस पूरे घटनाक्रम पर तस्वीर काफी हद तक साफ हो सकती है।
 
सूत्रों के अनुसार, तृणमूल कांग्रेस के बागी सांसद लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात कर संसद में अलग संसदीय ब्लॉक बनाने या खुद को ‘वास्तविक तृणमूल कांग्रेस’ के रूप में मान्यता देने का दावा पेश कर सकते हैं। इस संभावित कदम ने पश्चिम बंगाल के साथ-साथ राष्ट्रीय राजनीति में भी हलचल बढ़ा दी है।
 
बागी खेमे का दावा है कि उसके साथ 19 लोकसभा सांसदों का समर्थन मौजूद है। कूचबिहार के सांसद जगदीश चंद्र बर्मा बसुनिया ने भी संकेत दिया है कि सोमवार को इस संबंध में औपचारिक दावा प्रस्तुत किया जा सकता है। यदि ऐसा होता है तो यह तृणमूल कांग्रेस के 28 वर्षों के इतिहास का सबसे बड़ा आंतरिक संकट माना जाएगा।
 
हाल के महीनों में राज्यसभा के कई सांसद पार्टी छोड़ चुके हैं, जबकि लोकसभा सांसदों के एक बड़े वर्ग के असंतोष ने पार्टी नेतृत्व की चिंता बढ़ा दी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि बागी सांसद अलग संसदीय पहचान हासिल करने में सफल होते हैं तो इसका असर केवल बंगाल तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि संसद में विपक्ष की रणनीति और राष्ट्रीय राजनीतिक समीकरणों पर भी पड़ सकता है।
 
दूसरी ओर, तृणमूल नेतृत्व पूरे घटनाक्रम को चुनौती दे रहा है। पार्टी नेताओं का कहना है कि कथित समर्थन पत्र और उस पर मौजूद हस्ताक्षरों की प्रामाणिकता की जांच होनी चाहिए। पार्टी का दावा है कि बागी खेमा अपनी वास्तविक ताकत को बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर रहा है।
 
इसी बीच, वरिष्ठ नेता अनुब्रत मंडल का बयान भी चर्चा में है। उन्होंने अप्रत्यक्ष रूप से नेतृत्व पर निशाना साधते हुए कहा कि “जागते हुए भी अगर कोई सोने का नाटक करेगा तो पार्टी का यही हाल होगा।”
 
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि सोमवार का दिन तृणमूल कांग्रेस के भविष्य के साथ-साथ राष्ट्रीय विपक्ष की राजनीति के लिए भी अहम साबित हो सकता है। यदि बागी गुट अपने दावों के अनुरूप समर्थन जुटाने में सफल रहता है तो पार्टी में बड़ी टूट संभव है। वहीं, यदि ऐसा नहीं हो पाता तो ममता बनर्जी का नेतृत्व पहले से अधिक मजबूत होकर उभर सकता है।
 
फिलहाल कोलकाता से लेकर दिल्ली तक सभी की निगाहें सोमवार पर टिकी हैं। संसद में होने वाले घटनाक्रम से यह स्पष्ट हो सकता है कि तृणमूल कांग्रेस की राजनीति किस दिशा में आगे बढ़ेगी और बंगाल की सियासत में आगे क्या बदलाव देखने को मिलेंगे।

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