12 जून को जारी निर्देश के अनुसार, स्कूलों में सुबह प्रवेश के समय राष्ट्रगान, राष्ट्रगीत, दीप मंत्र, सरस्वती वंदना, गुरु मंत्र सहित छह प्रकार की प्रार्थनाएं कराई जाएंगी। इसके साथ ही प्रतिदिन किसी महापुरुष की जीवनी का वाचन भी किया जाएगा।
दोपहर में मध्यान्ह भोजन से पहले विद्यार्थियों को भोजन मंत्र का पाठ कराया जाएगा, जबकि स्कूल की छुट्टी के समय राज्यगीत, गायत्री मंत्र और शांति मंत्र का सामूहिक उच्चारण होगा। विभाग ने सभी स्कूलों को इस व्यवस्था का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
हालांकि, आदेश जारी होते ही इसे लेकर राजनीतिक बहस शुरू हो गई है। कांग्रेस ने फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा है कि सरकारी स्कूलों में सभी धर्मों और समुदायों के बच्चे अध्ययन करते हैं, इसलिए किसी विशेष धार्मिक परंपरा से जुड़े मंत्रों को अनिवार्य करना उचित नहीं है। कांग्रेस प्रदेश संचार प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला ने आरोप लगाया कि शिक्षा के माध्यम से एक विशेष विचारधारा को बढ़ावा देने का प्रयास किया जा रहा है।
वहीं भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस के विरोध को संस्कृति विरोधी बताते हुए पलटवार किया है। बीजेपी नेताओं का कहना है कि भारतीय संस्कृति और नैतिक मूल्यों से जुड़ी प्रार्थनाओं का विरोध समझ से परे है। इस मुद्दे पर दोनों प्रमुख दलों के बीच बयानबाजी तेज हो गई है।
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