बिलासपुर, 07 मई 2026: खरीफ सीजन की शुरुआत से पहले प्रदेश में खाद वितरण व्यवस्था को लेकर बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। शासन अब उर्वरक वितरण को डिजिटल प्लेटफॉर्म और एग्रीस्टैक प्रणाली से जोड़ने की तैयारी में है, ताकि किसानों को उनकी खेती के रकबे और फसल की जरूरत के अनुसार ही खाद उपलब्ध कराई जा सके।
नई व्यवस्था लागू होने के बाद मनमाफिक खाद खरीद पर रोक लगेगी और किसानों को जमीन के रिकॉर्ड के हिसाब से ही उर्वरक दिया जाएगा। सरकार का दावा है कि इससे खाद की कालाबाजारी और अनावश्यक भंडारण पर रोक लगेगी, वहीं वास्तविक किसानों तक समय पर खाद पहुंच सकेगी।
जानकारी के मुताबिक जिले में खरीफ सीजन के लिए करीब 44 हजार मीट्रिक टन खाद की आवश्यकता बताई गई है, जिसमें से लगभग आधा भंडारण पहले ही किया जा चुका है। हालांकि नई डिजिटल व्यवस्था लागू होने तक कई समितियों में खाद वितरण अस्थायी रूप से प्रभावित नजर आ रहा है, जिससे किसानों की चिंता बढ़ गई है।
प्रशासन का कहना है कि एग्रीस्टैक आधारित पोर्टल में किसानों की जमीन, बोई जाने वाली फसल और आवश्यक उर्वरक का पूरा रिकॉर्ड दर्ज किया जाएगा। इसके आधार पर ही खाद वितरण सुनिश्चित होगा। अधिकारियों के अनुसार इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और जरूरतमंद किसानों को प्राथमिकता मिल सकेगी।
वहीं किसान संगठनों का कहना है कि नई व्यवस्था की पूरी जानकारी अभी ग्रामीण क्षेत्रों तक नहीं पहुंच पाई है। कई किसानों को खाद वितरण रुकने की वजह समझ नहीं आ रही, जिससे वे समितियों के चक्कर लगाने को मजबूर हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह व्यवस्था सही तरीके से लागू हुई तो खाद वितरण प्रणाली अधिक पारदर्शी और संतुलित बन सकती है, लेकिन शुरुआती दौर में किसानों को जागरूक करना सबसे बड़ी चुनौती होगी।
खाद वितरण में बड़ा बदलाव: खेती के रकबे से तय होगी किसानों की जरूरत

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