रायपुर, 26 अप्रैल 2026। शिक्षा का अधिकार (RTE) कानून अब डिजिटल सिस्टम के जरिए गरीब बच्चों के सपनों को पंख दे रहा है। छत्तीसगढ़ में RTE पोर्टल से प्राइवेट स्कूलों में 25% सीटों पर फ्री एडमिशन की प्रक्रिया बेहद आसान हो गई है। अब अभिभावकों को स्कूलों के चक्कर नहीं काटने पड़ते, न ही दलालों के झांसे में आना पड़ता है।
कैसे काम करता है सिस्टम: अभिभावक मोबाइल या कंप्यूटर से RTE पोर्टल पर बच्चे का रजिस्ट्रेशन करते हैं। जरूरी दस्तावेज अपलोड कर 5 स्कूलों का विकल्प चुन सकते हैं। आवेदन के बाद ऑनलाइन लॉटरी से पारदर्शी तरीके से सीट अलॉट होती है। चयन की जानकारी SMS और पोर्टल पर मिल जाती है। फिर तय तारीख पर स्कूल जाकर एडमिशन लेना होता है।
क्या बदला डिजिटल होने से:
पारदर्शिता: पहले सीट को लेकर शिकायतें आती थीं। अब लॉटरी सिस्टम से भेदभाव खत्म।
दलाल आउट: बिचौलिए पैसे लेकर एडमिशन का झांसा देते थे। ऑनलाइन प्रक्रिया से *उनकी दुकान बंद*।
समय की बचत: कागजी फॉर्म, लाइन में लगना खत्म*। *घर बैठे 10 मिनट में *आवेदन*।
रियल टाइम अपडेट: हर स्टेज की जानकारी SMS पर। कब लॉटरी, कब डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन, सब पता चल जाता है।
अभिभावकों की जुबानी: बिलासपुर की सुनीता यादव बताती हैं, “पहले डर लगता था कि प्राइवेट स्कूल में एडमिशन कैसे होगा*। *इस बार मोबाइल से फॉर्म भरा, बेटी का नाम लॉटरी में आ गया*। *एक रुपया नहीं लगा*।” *हजारों परिवारों की यही कहानी है।
सरकार का फोकस: शिक्षा विभाग का कहना है कि डिजिटल RTE से योजना का लाभ आखिरी बच्चे तक पहुंच रहा है। इस साल 1.2 लाख से ज्यादा आवेदन आए हैं। लक्ष्य है कि कोई भी पात्र बच्चा शिक्षा से *वंचित न रहे*।

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