जिले के सरकारी और निजी स्कूलों के करीब 3000 डेड-इनएक्टिव खातों में लगभग 10 लाख रुपए सालों से फंसे पड़े हैं।
क्या है पूरा मामला: शिक्षा विभाग ने समय-समय पर विभिन्न योजनाओं के लिए स्कूलों के नाम पर कई बैंकों में अकाउंट खुलवाए। शासन से राशि भी जमा की गई। बाद में कई योजनाएं बंद हो गईं, स्कूलों ने नए बैंकों में खाते खुलवा लिए। पर पुराने खाते में बची राशि का न तो उपयोग हुआ, न शासन को वापस की गई। खाते इनएक्टिव हो गए, पैसा वहीं पड़ा रहा।
कलेक्टर का एक्शन: मामले की जानकारी मिलते ही कलेक्टर संजय अग्रवाल ने सख्त रुख अपनाया। उन्होंने DEO को सभी डेड अकाउंट बंद कर राशि शासन के खजाने में लौटाने के निर्देश दिए। DEO विजय टांडे ने बताया- ‘करीब 3 हजार खातों में 10 लाख फंसे हैं। ये पैसा अब सरकार को वापस किया जाएगा’।
आज अहम बैठक: 24 अप्रैल को सुबह 11 बजे प्रार्थना सभा भवन, जल संसाधन विभाग में DEO ने सभी DDO, BEO और प्राचार्यों की बैठक बुलाई है। बैठक में इनएक्टिव खातों को लेकर आगे की कार्रवाई और विशेष निर्देश दिए जाएंगे। सभी DDO की उपस्थिति अनिवार्य की गई है।
बैंकों से तालमेल: विभाग अब संबंधित बैंकों से मिलकर इन खातों को बंद कराएगा और जमा राशि को शासन के खाते में ट्रांसफर करेगा। इसमें सरकारी के साथ निजी स्कूलों के खाते भी शामिल हैं।

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