नामांकन रद्द होने के बाद मीनाक्षी नटराजन ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि पहले चुनावों में “वोट चोरी” की बातें होती थीं, लेकिन इस बार “सीट चोरी” की गई है। उन्होंने चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि लोकतांत्रिक संस्थाओं की साख को नुकसान पहुंचाया जा रहा है।
विवाद की जड़ उनके नामांकन के साथ दाखिल किए गए फॉर्म-26 में एक कथित लंबित मामले के खुलासे को लेकर है। रिटर्निंग ऑफिसर ने इसे अधूरा विवरण मानते हुए नामांकन खारिज कर दिया था। कांग्रेस का दावा है कि जिस मामले का हवाला दिया गया, उसमें न तो आरोप तय हुए थे और न ही ऐसा कोई तथ्य था जिसे अनिवार्य रूप से घोषित किया जाना चाहिए था।
इस घटनाक्रम के बाद मध्य प्रदेश की तीनों राज्यसभा सीटों पर भाजपा उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित हो गए। कांग्रेस ने इसे लोकतंत्र और चुनावी प्रक्रिया पर हमला बताते हुए देशभर में विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है।

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