‘पेट बार-बार खराब? कहीं आपकी ये 10 आदतें जिम्मेदार तो नहीं’: गैस-एसिडिटी-कब्ज से हैं परेशान | डॉक्टर ने बताए डाइजेशन सुधारने के 11 साइंटिफिक टिप्स

नई दिल्ली, 22 अप्रैल 2026। ‘पेट ठीक तो सब ठीक’*। लेकिन *गलत लाइफस्टाइल के चलते आज हर दूसरा इंसान गैस, एसिडिटी, कब्ज, ब्लोटिंग से परेशान है। गैस्ट्रो एक्सपर्ट डॉ. सुमित भाटिया बताते हैं कि डाइजेशन खराब होने के पीछे बीमारी नहीं, हमारी रोज की 10 आदतें जिम्मेदार हैं। इन्हें सुधार लें तो बिना दवा के पेट दुरुस्त हो जाएगा।

डाइजेशन बिगाड़ने वाली 10 आदतें:
खाना खाते ही लेट जाना: खाना ऊपर आ जाता है, एसिडिटी होती है।
जल्दी-जल्दी खाना: बिना चबाए निगलने से आंतों पर लोड बढ़ता है।
पानी कम पीना: 8-10 गिलास से कम पानी = कब्ज पक्की।
तला-भुना, मैदा ज्यादा खाना: ये धीमे पचता है, गैस बनाता है।
खाने के साथ खूब पानी पीना: डाइजेस्टिव जूस पतला हो जाता है।
रात में लेट डिनर: 9 बजे बाद खाना सोते वक्त नहीं पचता।
लगातार बैठे रहना: फिजिकल एक्टिविटी जीरो = आंतें सुस्त।
स्ट्रेस-टेंशन लेना: ब्रेन और गट का सीधा कनेक्शन है। स्ट्रेस में पाचन रुक जाता है।
चाय-कॉफी खाली पेट: एसिड बढ़ाती है, अल्सर का खतरा।
एंटीबायोटिक-एंटासिड का ज्यादा यूज: गुड बैक्टीरिया मर जाते हैं।

डाइजेशन सुधारने के 11 साइंटिफिक टिप्स:

खाने से जुड़े:
32 बार चबाएं: हर निवाला 32 बार चबाने से लार में मौजूद एंजाइम खाना तोड़ देते हैं। पेट का 50% काम मुंह में ही हो जाता है।
फाइबर बढ़ाएं: दलिया, ओट्स, फल, सलाद, हरी सब्जी। दिन में 25-30 ग्राम फाइबर कब्ज भगाता है।
प्रो-प्रोबायोटिक लें: दही, छाछ, किमची, कांजी। ये गुड बैक्टीरिया बढ़ाते हैं।
अदरक-जीरा-अजवाइन: खाने के बाद 1 चुटकी अजवाइन + काला नमक। गैस नहीं बनेगी।
मील टाइम फिक्स करें: रोज एक ही टाइम पर नाश्ता-लंच-डिनर। बॉडी क्लॉक सेट होती है।

लाइफस्टाइल से जुड़े:
खाने के 2 घंटे बाद सोएं: डिनर 8 बजे तक निपटा लें।
रोज 30 मिनट वॉक: खाने के 15 मिनट बाद 10 मिनट टहलना सबसे बेस्ट। आंतें एक्टिव रहती हैं।
पानी का रूल: सुबह उठते ही 2 गिलास गुनगुना पानी। खाने से 30 मिनट पहले और 45 मिनट बाद पानी पिएं। बीच में नहीं।
स्ट्रेस मैनेज करें: 10 मिनट अनुलोम-विलोम, मेडिटेशन। कोर्टिसोल कम होगा, डाइजेशन सुधरेगा।
पोजीशन ठीक रखें: टॉयलेट में पैरों के नीचे छोटा स्टूल रखें। स्क्वाट पोजीशन से मोशन आसानी से होता है।
7-8 घंटे नींद: कम सोने से गट के बैक्टीरिया बिगड़ते हैं।

कब जाएं डॉक्टर के पास: डॉ. भाटिया कहते हैं- ‘2 हफ्ते से ज्यादा कब्ज-दस्त, खून आना, वजन घटना, रात में पेट दर्द से नींद खुलना रेड फ्लैग हैं। तुरंत गैस्ट्रो डॉक्टर को दिखाएं’।

मिथ vs फैक्ट: मिथ: एसिडिटी में ठंडा दूध पियो। फैक्ट: दूध से तुरंत राहत लगती है पर बाद में कैल्शियम और ज्यादा एसिड बनवाता है। छाछ बेस्ट है।

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