रिजल्ट जल्दी, प्रवेश लेट, कमेटी गठन तक नहीं, शिक्षा विभाग की तैयारी अधूरी

रायपुर, 24 मई 2026। छत्तीसगढ़ में 12वीं बोर्ड परीक्षाओं के परिणाम जारी होने के बावजूद शासकीय विश्वविद्यालयों और उनसे संबद्ध कॉलेजों में प्रवेश प्रक्रिया अब तक शुरू नहीं हो सकी है। सीजी बोर्ड, CBSE समेत अधिकांश बोर्डों के रिजल्ट घोषित हो चुके हैं, लेकिन उच्च शिक्षा विभाग की ओर से न तो प्रवेश मार्गदर्शिका जारी की गई है और न ही एडमिशन प्रक्रिया की स्पष्ट तिथि घोषित की गई है। इससे विद्यार्थियों और अभिभावकों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
नई शिक्षा नीति (NEP) लागू होने के बाद समय पर सत्र प्रारंभ करने और अकादमिक कैलेंडर को व्यवस्थित रखने पर जोर दिया जा रहा है। इसी उद्देश्य से बोर्ड परीक्षाओं के परिणाम भी पहले जारी किए गए, लेकिन कॉलेज प्रवेश प्रक्रिया में लगातार हो रही देरी इस व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रही है।
शिक्षाविदों का कहना है कि यदि समय पर एडमिशन नहीं हुए तो NEP का उद्देश्य अधूरा रह जाएगा। प्रदेश में हर साल कॉलेजों में प्रवेश की तिथि कई बार बढ़ाई जाती है, जिसके कारण प्रवेश प्रक्रिया सितंबर तक चलती रहती है। इसका सीधा असर पढ़ाई और परीक्षाओं के शेड्यूल पर पड़ता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, सेमेस्टर सिस्टम लागू होने के बाद स्थिति और गंभीर हो गई है। पहले वार्षिक परीक्षा प्रणाली में विद्यार्थियों को पूरे वर्ष का समय मिलता था, लेकिन अब दिसंबर में पहले सेमेस्टर की परीक्षा आयोजित होनी है। ऐसे में यदि एडमिशन सितंबर तक चलते रहे तो नियमित कक्षाएं और पाठ्यक्रम पूरा करना मुश्किल हो जाएगा।
जानकारों का कहना है कि प्रदेश के अधिकांश कॉलेज प्रवेश के लिए पूरी तरह तैयार हैं और 15 जून से प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी की जा रही है, लेकिन अब तक शासन स्तर पर कोई ठोस निर्देश जारी नहीं हुए हैं। यहां तक कि प्रवेश मार्गदर्शिका तैयार करने के लिए समिति गठन की जानकारी भी सामने नहीं आई है।
इधर, निजी शिक्षण संस्थानों ने तेजी दिखानी शुरू कर दी है। कई निजी कॉलेज और संस्थान 12वीं का रिजल्ट जारी होते ही छात्रों से प्रारंभिक शुल्क लेकर रजिस्ट्रेशन कर रहे हैं। इससे वे समय रहते अपनी सीटें भरने की कोशिश में जुट गए हैं। शिक्षाविदों का मानना है कि यदि सरकारी कॉलेजों में प्रवेश प्रक्रिया में इसी तरह देरी होती रही तो बड़ी संख्या में छात्र निजी संस्थानों की ओर रुख कर सकते हैं, जिससे सरकारी कॉलेजों की सीटें खाली रह जाने का खतरा बढ़ जाएगा।

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