विशेष बच्चों के लिए SC का बड़ा आदेश, 49 हजार शिक्षकों की जरूरत, नियुक्ति प्रक्रिया तेज करने के निर्देश

बिलासपुर, 24 मई 2026। छत्तीसगढ़ में विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की शिक्षा व्यवस्था को लेकर सर्वोच्च न्यायालय ने बड़ा और महत्वपूर्ण आदेश दिया है। अदालत ने राज्य सरकार को विशेष शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया जल्द पूरी करने के निर्देश देते हुए कहा है कि प्रदेश में हजारों दिव्यांग एवं विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की शिक्षा प्रभावित नहीं होनी चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने माना कि छत्तीसगढ़ में 49 हजार से अधिक विशेष आवश्यकता वाले बच्चे अध्ययनरत हैं और उनकी शिक्षा व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए करीब 3981 विशेष शिक्षकों की जरूरत है। अदालत ने राज्य सरकार को लंबित मामलों का जल्द निराकरण कर नियुक्तियां पूरी करने के निर्देश दिए हैं।
155 BRP और 85 विशेष शिक्षकों को मिलेगा अवसर
अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि प्राथमिक स्तर पर 155 ब्लॉक रिसोर्स पर्सन (BRP) तथा माध्यमिक स्तर पर 85 विशेष शिक्षकों के मामलों का परीक्षण किया जाए। इन सभी उम्मीदवारों को उनके शैक्षणिक एवं व्यावसायिक दस्तावेजों के साथ स्क्रीनिंग कमेटी के समक्ष उपस्थित होने का अवसर देने के निर्देश दिए गए हैं।
कोर्ट ने कहा कि पात्र पाए जाने वाले उम्मीदवारों की नियुक्ति प्रक्रिया पूरी होने के बाद राज्य सरकार शेष रिक्त पदों पर नई भर्ती प्रक्रिया शुरू कर सकती है।
दो माह में प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने राज्य शासन को निर्देशित किया कि योग्य उम्मीदवारों की नियुक्ति की प्रक्रिया यथासंभव दो माह के भीतर पूरी की जाए। साथ ही जुलाई 2026 तक पूरी कार्रवाई की रिपोर्ट न्यायालय में प्रस्तुत करने को कहा गया है।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि जिन उम्मीदवारों के पास भारतीय पुनर्वास परिषद (RCI) द्वारा निर्धारित योग्यता और आवश्यक पात्रताएं हों, उनके मामलों पर नियमानुसार विचार किया जाए।
848 स्वीकृत पदों में सिर्फ 100 पर निकला था विज्ञापन
राज्य सरकार द्वारा न्यायालय में पेश हलफनामे के अनुसार छत्तीसगढ़ में विशेष शिक्षकों के कुल 848 पद स्वीकृत हैं। इनमें से केवल 100 पदों के लिए 3 अक्टूबर 2025 को भर्ती विज्ञापन जारी किया गया था।
भर्ती प्रक्रिया के तहत RCI मान्यता प्राप्त योग्यता रखने वाले 62 शिक्षकों की नियुक्ति हो चुकी है, जबकि 38 पद शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) से जुड़े विषयों के कारण अब भी रिक्त हैं।
समावेशी शिक्षा को मिलेगा मजबूती
सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के शिक्षा के अधिकार को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इससे राज्य में समावेशी और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा व्यवस्था को मजबूती मिलेगी तथा दिव्यांग बच्चों को बेहतर शैक्षणिक सहायता उपलब्ध हो सकेगी।

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